Wednesday, 31 January 2024
पत्थर पर फूल उकेरा था
Tuesday, 30 January 2024
आत्मिका
Friday, 26 January 2024
गाओ रे! झूम झूम!
Thursday, 25 January 2024
झुर्रियों की शक्ल में
Wednesday, 24 January 2024
गीत गाता हूँ मैं
गीत गाता हूँ मैं
अक्षरों से शब्द तक का यह सफर
चेतना फिर हो चले जिस में प्रखर
भाव की उत्प्रेरणा जब जागती है
तब कहीं इक गीत होता है मुखर
गीत गाता हूँ, मैं गीत गाता हूँ
वेदना, संवेदना, प्रतिवेदना मिल
हो गलित इक धार में बहने लगे
खुद बहे पहले, सभी उसमें बहें
तो समझ लो गीत हैं उठने लगे
गीत गाता हूँ, मैं गीत गाता हूँ
गीत का उत्थान भी इक ज्वार है
गीत काली रात का अभिसार है
गीत भावों की विकल अभिव्यंजना
गीत अधरों का मधुर श्रृंगार है
गीत गाता हूँ, मैं गीत गाता हूँ
प्रियतमा के नैन से जब नीर बहता
श्वाँस में प्रश्वाँस में है गीत चलता
जब प्रणय की रागिनी में हो घुला
छ्न्द बन्दों में स्वयं ही गीत ढलता
गीत गाता हूँ, मैं गीत गाता हूँ
गीत करुणा की मृदुल सी धार है
गीत घुंघरू की मुखर झंकार है
गीत दिल के बादलों से झर रही
झिरमिराती सी मधुर मनुहार है
गीत गाता हूँ, मैं गीत गाता हूँ
गीत हैं उत्सव, हैं गीत भी कलरव
स्वर्ग भी हैं ये, हैं और ये रौरव
सुख के और दुःख के अधिमान भी
हैं पुरातन के पुरोधा और अभिनव
गीत गाता हूँ, मैं गीत गाता हूँ
गीत हैं आलाप उठता कण्ठ से
गीत भीगा है कहीं मकरन्द से
गीत उठता नाद है मिरदंग से
झर रहा अनुराग हो हर छ्न्द से
गीत गाता हूँ, मैं गीत गाता हूँ
गीत लय है गीत सुर है ताल भी
गीत गति है गीत मद्धिम चाल भी
शौर्य का आह्वान करते गीत हैं
गीत मारक शक्ति भी है ढाल भी
गीत गाता हूँ, मैं गीत गाता हूँ
गीत गाथागीत बन जग में रमा
लोकरंजक गीत ने बाँधा समा
लोकमंगल गीत बिन कैसे शुरू
गीत ही हर उत्स की है मधुरिमा
गीत गाता हूँ, मैं गीत गाता हूँ
प्रीत की पावन धरा में बीज सा
भावना के सिन्धु में है मीन सा
पुष्प के हर अंग में अभ्यंग में
महमहाता गीत है मधुमास सा
गीत गाता हूँ, मैं गीत गाता हूँ
गीत जीवन जीवनी के गा रहा
प्रेम की पगडण्डियों पे ला रहा
एक बन्जारा समझलो आज मैं
कारवाँ के गीत अपने गा रहा
गीत गाता हूँ, मैं गीत गाता हूँ
रामनारायण सोनी
२५.०१.२४
Sunday, 21 January 2024
वे लकीरें
विद्युल्लता की समीक्षाएँ
Monday, 8 January 2024
वह आवाज दे रही है
Saturday, 6 January 2024
हे अंशुमान
Friday, 5 January 2024
फिर माटी माटी में धर दी
Wednesday, 3 January 2024
चल रे जीवन उछल उछल
Monday, 1 January 2024
दिल का दर्पण टूट गया
कैसे घुल गए हो मुझ में?
कैसे घुल गए हो मुझ में अकेला निकला था अकेला ही निकल लूँगा साथ मिला भी तो किस किस का? इसका, उसका, तुम्हारा, उनका कोई रुका, तो कोई खिसका कोई ...
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वह आवाज दे रही है आवाजें आवाजें ही आवाजें कई कई, किसम किसम की आवाजें कानों की गुफाओं में आती हैं कोई खूबसूरत, कोई विषैली तो कोई कुछ बहुतेरी ...
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हे अंशुमान! भूधर के सुन्दर ललाट पर हिंगुल सी बिखरा रोली पुष्पों की उघरी पलकों पर शलभों की आई टोली सूरज के स्वागत में उषा स्वर्णमाल लेकर बोली...
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पत्थर पर फूल उकेरा था लाऊँ कहाँ से पल लौटा कर जो तुम ले कर चले गये रखूँ कहाँ यादों के पंछी पवन, गगन से छले गये नयन मेरे ये रीत गये हैं, अधरो...