कैसे घुल गए हो मुझ में
अकेला निकला था
अकेला ही निकल लूँगा
साथ मिला भी तो किस किस का?
इसका, उसका, तुम्हारा, उनका
कोई रुका, तो कोई खिसका
कोई मिला मन भर, तो कोई भिनका
बिछुड़े सभी बारी बारी
एक तुम हो कि घुल गये हो
मुझ में, मेरे मन में, अवचेतन में
निकल भी जाओ अभी बाहर
नहीं तो! नहीं तो...
जल जाओगे मेरी इस माटी के संग संग
देखो! सुनो!! समझो! मान भी जाओ !
ऐसे में, जीवन के उस पार
कैसे पा सकूँगा फिर से तुम्हें
रामनारायण सोनी
20.3.24