Monday, 4 December 2023

राम को नाम अधार है

राम को नाम अधार है

प्रीत गयी सब रीत गई गये सारे ठाठ ठठेरन के
सब तात गये मन मीत गये टूटे सपन सबेरन के
ठठरी का है छूटा ठौर कहीं न नाते रहे ममेरन के
थक हार गिरे कछु धाय चले बंजारे लोग बसेरन के

नाम गया अरु धाम गया राउर रंक मिले एहि घाटे
छैल छबीली ओ जोगी जती अन्त मिलै सबै एहि बाटे 
कौन सहाय करै बिना पनही राह बिछे काँटे ही काँटे
राम को नाम है एक अधार सबही भव बंधन काटे

रामनारायण सोनी




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