Thursday, 30 November 2023

भोर की रश्मियाँ

भोर की संकल्पना जगने लगे तो 
काट बन्धन तिमिर को अवसान देना
रात भर लड़ती रही है रश्मियाँ
प्रात को उस पल ज़रा सम्मान देना ।।

हो रही हिंगुल प्रभाती सर्जनाएँ
रोलियाँ छितरी छटा छबि छैल सी
काटती जो उर बसी वे वर्जनाएँ
हो सके तो रश्मि को अधिमान देना।।


रामनारायण सोनी
30.11.2023

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