Thursday, 2 November 2023

रंगमंच के रंग


रंगमंच पर खिलते हैं मंच के रंग
जीवन के महीन, तीखे और मन्द
रंग ही रंग, 
छटा के संग
लेकर उतरता है कलाकार
सबसे ज्यादा वह बोलता है तन से 
आवाज की थिरकती लय सैर कराती है 
हमें जिन्दगी के उतार चढ़ाव की
पर शब्दों से वे
हाँ, शब्द बस थोड़ा सा ही कह पाते हैं
आदमी कितना बोलता है बिना बोले ही
जिन्दगी के रंगमंच पर

रामनारायण सोनी
25.10.23

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