कुछ तो उसकी बात करो
आज हृदय की खोल ग्रन्थि तुम कुछ बोलो कुछ बात करो
रेशम सी वाणी का मधुरस कानों में घोलो बात करो
उन बोलों को फिर दोहराओ प्रथम मिलन पर जो बोले थे
चपल नयन पर रोक पलक को खोल अधर वो बात करो।
आज हृदय की खोल ग्रन्थि तुम कुछ बोलो कुछ बात करो।।
उस पल अपने विकल हृदय की धड़कन की वो बात करो
आँगन की लुक्का छुप्पी और पीपल छैंया याद करो
दूर खड़े ही मन ही मन हम कितने उलझे याद करो
कैसी सिहरन हम में दौड़ी थोड़ा वह संवाद करो।
आज हृदय की खोल ग्रन्थि तुम कुछ बोलो कुछ बात करो।।
याद तुम्हें तो वह भी होगा हम मूरत से खड़े रह गये
पाँव हमारे वहीं निगोड़े खंभे जैसे गड़े रह गये
साँसें, धड़कन, सुध-बुध सब के सब वे जमे रह गये
जीवन के उन स्वर्णिम लमहों की बोलो कुछ तो बात करो।
आज हृदय की खोल ग्रन्थि तुम कुछ बोलो कुछ बात करो।।
रामनारायण सोनी
५.१०.२३
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