रूह से महसूस करो
होगा कोई और ही
जो घर में खुले दरवाजे से आयगा
पर यार मेरे! जान ले जरा कि
मैं तो धूप का वह टुकड़ा हूँ
बिना खिड़की दरवाजा खोले
बिना कोई शीशा तोड़े
पहुँच जाता हूँ तुझ तक!
अपनी ऊष्मा लिये!!
क्योंकि मैं धूप की शक्ल में
बस एक रूह हूँ
रूह से महसूस करो इसे
हाँ, यह मैं ही हूँ
रामनारायण सोनी
१६.१०.२३
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