तो सच कहो!
भाग तो गये हो,
कि जैसे कोई पानी पर दाैड़ गया हो
बस लहरें कुछ छोड़ गया हो
जैसे डूबता सूरज
लाली बस छोड़ गया हो
काली तमस भरी निशा में
आस का जलता दीप छोड़ गया हो
सच कहो मीत मेरे
मुझ से कभी भी, कहीं भी
कैसे भी, अलग हो पाये हो क्या?
रामनारायण सोनी
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