बटुवे में पल
मैंने तुम्हें दिये थे वे
जो चुने हुए अनगढ़ से बनफूल
मुरझा गये होंगे, सूख गये होंगे
झड़ कर बिखर गये होंगे
अपनी अक्खड़ डंठलों से
और....
तुमने मुझे दिये हैं वे
प्यार की खुशबू भरे पल
वे महकते ही रहते हैं
दिल के बटुवे की
अन्दरूनी तहों में
अभी भी जस के तस...
रामनारायण सोनी
२७.०७.२३
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