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कैसे घुल गए हो मुझ में?
कैसे घुल गए हो मुझ में अकेला निकला था अकेला ही निकल लूँगा साथ मिला भी तो किस किस का? इसका, उसका, तुम्हारा, उनका कोई रुका, तो कोई खिसका कोई ...
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वह आवाज दे रही है आवाजें आवाजें ही आवाजें कई कई, किसम किसम की आवाजें कानों की गुफाओं में आती हैं कोई खूबसूरत, कोई विषैली तो कोई कुछ बहुतेरी ...
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हे अंशुमान! भूधर के सुन्दर ललाट पर हिंगुल सी बिखरा रोली पुष्पों की उघरी पलकों पर शलभों की आई टोली सूरज के स्वागत में उषा स्वर्णमाल लेकर बोली...
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पत्थर पर फूल उकेरा था लाऊँ कहाँ से पल लौटा कर जो तुम ले कर चले गये रखूँ कहाँ यादों के पंछी पवन, गगन से छले गये नयन मेरे ये रीत गये हैं, अधरो...
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